उल्फ़त का साज़ छेड़ो, समा सुहाना है,
जलवे भी नाच उठे, दिल का तराना है
उल्फ़त का साज़ छेड़ो …
दर पे हुज़ूर आये, लेके मुराद हम भी
इतनी सी आर्ज़ू है, रह जायें याद हम भी
उल्फ़त का साज़ छेड़ो …
दोनो जहाँ हम भी, तुम पर निसार करें
कद्मोन पे चाँद तारे, सजदे हज़ार करें
उल्फ़त का साज़ छेड़ो …
महफ़िल में आज शमा, कर देगी नाम रोशन,
थामेगा आज कोई, दिल का हसीन दामन
उल्फ़त का साज़ छेड़ो …