उलझ गये दो नैना, देखो
उलझ गये …
ल: प्रीतम उलझी लट सुलझाये
हे: गोरी का चन्दा सा मुख शरमाये
दो: प्रीतम उलझी लट सुलझाये
गोरी का चन्दा सा मुख शरमाये
प्रीत की डोरी में बाँध कर दोनो मन ही मन मुसकाये रे
देखो उलझ गये दो नैना …
ल: जब तक घर न आये साँवरिया
हे: तड़पे है गोरी जैसे जल बिन मछरिया
ल: बाट तकत अपने साजन की
राह में नैन बिछाये देखो
दो: उलझ गये दो नैना …
ल: रात रुपहली तारों की छैंय्या
हे: सैंय्या के हाथों में गोरी गोरी बैंय्या
दो: रात रुपहली तारों की छैंय्या
हे: सैंय्या के हाथों में गोरी गोरी बैंय्या
ल: लाज भरे नैनों से मन की बात कही न जाये
देखो उलझ गये दो नैना
दो: उलझ गये दो नैना
देखो उलझ गये दो नैना