तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साये में शाम कर लूंगा
सफ़र इक उम्र का पल में तमाम कर लूंगा
नज़र मिलाई तो पूछूँगा इश्क़ का अंजाम
नज़र झुकाई तो खाली सलाम कर लूंगा
जहाँ-ए-दिल पे हुक़ूमत तुम्हें मुबारक हो
रही शिकस्त तो मैं अपने नाम कर लूंगा
तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साये में शाम कर लूंगा
सफ़र इक उम्र का पल में तमाम कर लूंगा
नज़र मिलाई तो पूछूँगा इश्क़ का अंजाम
नज़र झुकाई तो खाली सलाम कर लूंगा
जहाँ-ए-दिल पे हुक़ूमत तुम्हें मुबारक हो
रही शिकस्त तो मैं अपने नाम कर लूंगा
tumhārī zulf ke sāye meṅ śhām kar lūṅgā
safar ik umr kā pal meṅ tamām kar lūṅgā
nazar milāī to pūchhūṇgā iśhq kā aṅjām
nazar jhukāī to khālī salām kar lūṅgā
jahāṇ-e-dil pe huqūmat tumheṅ mubārak ho
rahī śhikast to maiṅ apne nām kar lūṅgā