तू आये न आये तेरी खुशी
हम आस लगाये बैठे हैं
दीदार की प्यासी आँखों में
तूफ़ान छुपाये बैठे हैं
तू आये न आये …
इतना तो बता दे ओ ज़ालिम
अब नज़रों से क्यों दूर है तू
मिलना ही तुझे मंज़ूर नहीं
या मेरी तरह मजबूर है तू
तू कह दे अगर हम उठ जायें
हम तेरे बिठाये बैठे हैं
तू आये न आये …
अए दद.र-ए-मुहब्बत तेरी क़सम
दिल हमने लगा कर देख लिया
अस्क़ों की ज़ुबानी किस्सा-ए-ग़म
दुनिया को सुना के देख लिया
तूफ़ान से कह दो घिर के उठे
हम बैठे हैं
तू आये न आये …