अनिल बिस्वस, सर्दर अख्तर अन्द चोरुस: सुनो पंछी के राग करे कोयल पुकार
अहा खेतों पे पडती है जल की फुहार
फ़ेमले वोइcए (प्रोबब्ल्य सर्दर अख्तर): मेरे आशा के जीवन में आई बहार
चले शीतल पवन खिले फूलों की डार
बनी अपने पिया के गले का मैं हार
मेरे आशा के जीवन में आई बहार …
फ़ेमले वोइcए (प्रोबब्ल्य ज्योति): उठे मन में तरंग बहे अमृत की धार
कहीं आये बलम किये बैठी सिंगार
प्रोबब्ल्य सुरेन्द्र: मची बाग़ों में धूम किये पत्ते निखार
हुआ फूलों के गहने से बन का सिंगार
प्रोबब्ल्य हरिश: पड़ी नैनों पे चोट लगी दिल में कटार
चले छैला सजनवा जो छाती उभार्