शब-ए-ग़म सुबह हो गई रोते-रोते
कटी रात लेकिन कटी रोते-रोते
ख़्याल आ गया अपनी क़िस्मत का जिस दम
तो दिल को हँसी आ गई रोते-रोते
मुहब्बत को अन्धा किया आँसुओं ने
कि जाती रही रोशनी रोते-रोते
शमा की तरह अपने दिल की लगी भी
लगी हँसते-हँसते बुझी रोते-रोते
शब-ए-ग़म सुबह हो गई रोते-रोते
कटी रात लेकिन कटी रोते-रोते
ख़्याल आ गया अपनी क़िस्मत का जिस दम
तो दिल को हँसी आ गई रोते-रोते
मुहब्बत को अन्धा किया आँसुओं ने
कि जाती रही रोशनी रोते-रोते
शमा की तरह अपने दिल की लगी भी
लगी हँसते-हँसते बुझी रोते-रोते
śhab-e-ġham subah ho gaī rote-rote
kaṭī rāt lekin kaṭī rote-rote
khyāl ā gayā apnī qismat kā jis dam
to dil ko hṇsī ā gaī rote-rote
muhabbat ko andhā kiyā āṇsuoṅ ne
ki jātī rahī rośhnī rote-rote
śhamā kī tarah apne dil kī lagī bhī
lagī hṇste-hṇste bujhī rote-rote