सु: शाम-ए-बहार आई
करके सिंगार आई
ख़ाबों के हार लाई
र: अब्र-ए-बहार छया
पैग़ाम-ए-यार लाया
दिल को क़रार लाया
सु: शाम-ए-बहार आई
करके सिंगार आई
ख़ाबों के हार लाई
आया ख़ुशी का ज़माना
उल्फ़त ने छेड़ा तराना
र: होंठों पे दिल की हैं बातें
आईं मोहब्बत की रातें
सु: झुकने लगीं क्यूँ निगाहें
को: निगाहें
र: दिल से मिलीं दिल की राहें
को: राहें
सु: उनका पयाम आया
दिल का सलाम आया
होंठों पे ना-ए-ख़ुदा
किसका ये नाम आया
सु: शाम-ए-बहार आई
करके सिंगार आई
ख़ाबों के हार लाई
र: अब्र-ए-बहार छया
पैग़ाम-ए-यार लाया
दिल को क़रार लाया
उठेगी पलकों की चिलमन
बढ़ेगा उल्फ़त का दामन
सु: दिलों के ग़ुंचे खिलेंगे
मेरे मसीहा मिलेंगे
र: कमी है दर्द-ए-जिगर में
को: जिगर में
सु: हँसते हैं अरमाँ नज़र में
को: नज़र में
र: उनका पयाम आया
दिल का सलाम आया
होंठों पे ना-ए-ख़ुदा
किसका ये नाम आया
सु: शाम-ए-बहार आई
करके सिंगार आई
ख़ाबों के हार लाई
र: अब्र-ए-बहार छया
पैग़ाम-ए-यार लाया
दिल को क़रार लाया