मे: ( सावन की रुत भाये सजनवा
सावन की रुत भाये ) -2
तेरी गली में बादर छाये -2
कुंजन मोर नचाये -2
सावन की रुत भाये सजनवा
सावन की रुत भाये -2
सु: तेरी गली में इक परदेसी -2
आया है आस लगाये -2
उसकी आस में प्यास छिपी है -2
प्यासे को कौन बुलाये -2
सावन की रितु भाये सजनवा
सावन की रितु भाये -2
मे: रूप-नगर का लोभी-जोगी -2
नैनों का जाल बिछाये -2
सु: वो जोगी तो रूप-नगर की -2
रानी का गुन गाये -2
सावन की रितु भाये सजनवा
मे: सावन की रुत भाये सजनवा
दो: सावन की रुत भाये -2