रस्म-ए-उलफ़त किसी सूरत से निभाये न बने
बात कुछ बिग्ड़ी है ऐसी के बनाये न बने
रस्म-ए-उलफ़त किसी …
हुस्न मजबूर इधर इश्क़ प्रेशान उधर
ऐसा कुछ उलझा हा दामन कि छुड़ाये न बने
रस्म-ए-उलफ़त किसी …
मेरा घर जल गया मजबूर हैं दुनिया वाले
है ये वो आग जो पानी से बुझाये न बने
रस्म-ए-उलफ़त किसी …
कया करूँ कया न करूँ दोनो तरेह मुशकिल है
आप जाये न बने उनको बुलाये न बने
रस्म-ए-उलफ़त किसी …