सु: क़िस्मत का नहीं दोष बावरे आ आ आऽ
दो: क़िस्मत का नहीन दोष बावरे, दोष नहीं भगवान का
दुख देना इंसान को जग में काम रहा इंसान का
क़िस्मत का नहीं दोष बावरे
सु: सुख की नींद न सो पायेगा, जाग ओ पापी जाग रे
किसकी फुलवारी में लगा दी, नाहक़ तू ने आग रे
जगमग जलने दिया न जग में, दीप किसी के प्रान का
दो: दुख देना इंसान को जग में, काम रहा इंसान का
क़िस्मत का नहीं दोष बावरे
सु: (किस के रस को विष कर डाला)-2
दिया किसे दुख का विष-प्याला
एक दिन तुझको भी डस लेगी, तेरे पापों की विष ज्वाला
शोला भड़क उठेगा एक दिन, तेरे सोये ज्ञान का
दो: दुख देना इंसान को जग में, काम रहा इंसान का
क़िस्मत का नहीं दोष बावरे, दोष नहीं भगवान का
दुख देना इंसान को जग में काम रहा इंसान का
क़िस्मत का नहीं दोष बावरे