पत राखो गिरधारी
अब पत राखो गिरधारी
आन पड़ी है शरण तिहारी
एक अबला, प्रभु जी, दुखियारी
पत राखो गिरधारी …
चुपके चुपके दूर देस से
आया एक ब्यापारी
कर के झूठा प्रीत का सौदा
पूँजी ले गया सारी
पत राखो गिरधारी …
पापी मन से हँसी हँसी में
भूल हुई है भारी
प्रीत के हाथों उजड़ चुकी है
जीवन की फूलवारी
पत राखो गिरधारी …