ओ आस्मान के बासी
तुझपे पानी भरी बदरिया, सारी दुनिया प्यासी
ओ आस्मान के बासी …
एक नज़र से देखनेवाले, क्यूं दो बाग़ लगाये -2
एक बिना माली के सूखा, एक सदा लहराये
एक ओर खुशियों क मेला, दूजी ओर उदासी
ओ आस्मान के बासी …
मैने जो भी दीया जलाय, तूने उसे बुझाय -2
काले बादल की चादर में हंसता चांद छुपाया
देख न पाया लबों पे मेरे तू मुस्कान ज़रा सी
ओ आस्मान के बासी …