जो मैं ऐसा जानती
के प्रीत किये दुख होय
ओ, नगर ढिंढोरा पीटती
के प्रीत न करियो कोय
मोहे भूल गए साँवरिया, भूल गए साँवरिया -2
आवन कह गये, अजहुं न आये -2
लीनी न मोरी खबरिया
मोहे भूल गए…
(दिल को दिए क्यों दुख बिरहा के
तोड़ दिया क्यों महल बना के) -2
आस दिला के ओ बेदर्दी -2
फेर ली काहे नजरिया
मोहे भूल गए…
(नैन कहे रो-रो के सजना
देख चुके हम प्यार का सपना) -2
प्रीत है झूटी, प्रीतम झूटा -2
झूटी है सारी नगरिया
मोहे भूल गए…
% -- षशिख़न्त ज़ोशि उर्फ़ Pइन्तु डिवन