मेरे मुंडेरे ना बोल, जा कागा, कागा जा
पथ्थर दिल परदेसी,
ना जाने क्या है पीर पराई
अपनी तो ये बात हुई है,
दिल भर आया आंख भर आई
सन्झ सवेरे मन यही बोले,
आ रे सजनवा आ
जा कागा, कागा जा
मेरे मुंडेरे ना बोल -
प्रीत की बाज़ि हारी हम ने
तोड़ दिया हम को अब ग़म ने
ओ परदेसी जानेवाले,
तेरा बिग्ड़ा क्या
जा कागा, कागा जा
मेरे मुंडेरे ना बोल -