मेहताब तेरा चेहरा
किस ख्वाब में देखा था
ऐ हुस्न-ए-जहां बतला
तू कौन मैं कौन हूँ
ख्वाबों में मिले अक्सर
एक राह चलें मिलकर
फिर भी है यही बेहतर
मत पूछो मैं कौन हूँ
हुस्न-ओ-इश्क़ हैं तेरे जहां
दिलकी धड़कनें तेरी जुबां
आज ज़िन्दगी तुझसे जवां
आगाज़ है क्या मेरा, अंजाम है क्या मेरा
है मेरा मुकद्दर क्या
बतला के मैं कौन हूँ
क्यों घिरी घटा तू ही बता
क्यों हँसी फ़िज़ा तू ही बता
फूल क्यों खिला तू ही बता
इस राह पे चलना है
किस गाह पे रुकना है
किस काम को करना है
बतला के मैं कौन हूँ
ज़िन्दगी को तू गीत बना
दिल के साज़ पे झुमके गा
इस जहां को तू प्यार सिखा