त: हर नयी रात, नया दद.र लिये आती है
नींद आँखों से, बहुत दूर हुई जाती है
मत छेड़ ज़िंदगी के खामोश तार सो जा
दिल-ए-बेक़रार सो जा-2
तारे चमक के अपनी मंज़िल को जा रहे हैं-2
मंज़िल की याद में हम आँसू बहा रहे हैं-2
हर रात कह रही है, अए अश्क़बार सो जा
दिल-ए-बेक़रार सो जा …
ल: ओऽऽऽ ओऽऽ ओऽऽऽ
नज़रें चुराने वाले नज़रें ज़रा उठाना, नज़रें ज़रा उठाना
सीखा कहाँ से तूने उल्फ़त में दिल जलाना, उल्फ़त में दिल जलाना
ओ दिल जलाने वाले, कहता है प्यार सो जा
दिल-ए-बेक़रार सो जा …