आऽ आऽ अऽ अऽ
मैं हूँ उजड़ा आशियाँ
एक मिटा हुआ निशाँ
भूली हुई दासतान
मैं हूँ …
गुल खिले तो क्या खिले
भूलनेवाले सनम
तुम मिले तो क्या मिले
मिलके भी जुदा हूँ मैं
दूरी की सदा हूँ मैं
जैसे गद.र-ए-कारवाँ
मैं हूँ …
तुमने फेर ली नज़र
दिल पे क्या गुज़र गई
ये किसी को क्या खबर
लुट गया साज़-ए-दिल
किससे कहूँ राज़-ए-दिल
कोई नहीं राज़दाँ
मैं हूँ …
ज़ुल्म ढाये जाओ तुम
मेरी इन वफ़ाओं को
आज़माये जाओ तुम
ग़म पे ग़म दिये चलो
तुम दुआ लिये चलो
मेरे प्यारे महरबाँ
मैं हूँ …