क्या क्या न लोग चल बसे -2
शौक़-ए-जमाल-ए-यार में
हमसे हज़ारों मिट गये -2
हालत-ए-इन्तेज़ार में
पूरी तरह खिले न फूल
रह गयी दिल में हसरतें -2
बाग़ ही सारा जल गया -2
आग लगी बहार में
क्या क्या न लोग …
फीकी पड़ी है चाँदनी
तारे भी झिलमिलाते हैं -2
सब हैं नज़र में बेक़रार -2
दिल जो नहीं क़रार में
क्या क्या न लोग …
मिट भी गये तो क्या हुआ
मौत है एक ज़िंदगी -2
एक नाम और बढ़ गया -2
दुनिया की यादगार में
क्या क्या न लोग …