कोई तो सुने मेरे ग़म का फ़साना
कहीं मार डाले न ज़ालिम ज़माना
क़फ़स में ऐ बुलबुल तू जी भर के रो ले
चमन में तेरा जल गया आशियाना
कहीं मार डाले न …
क़सम है तुम्हें मेरी बरबादियों की
मेरी मौत पर भी न आँसू बहाना
कहीं मार डाले न …
कोई तो सुने मेरे ग़म का फ़साना
कहीं मार डाले न ज़ालिम ज़माना
क़फ़स में ऐ बुलबुल तू जी भर के रो ले
चमन में तेरा जल गया आशियाना
कहीं मार डाले न …
क़सम है तुम्हें मेरी बरबादियों की
मेरी मौत पर भी न आँसू बहाना
कहीं मार डाले न …
koī to sune mere ġham kā fasānā
kahīṅ mār ḍāle na zālim zamānā
qafas meṅ ai bulbul tū jī bhar ke ro le
chaman meṅ terā jal gayā āśhiyānā
kahīṅ mār ḍāle na …
qasam hai tumheṅ merī barbādiyoṅ kī
merī maut par bhī na āṇsū bahānā
kahīṅ mār ḍāle na …