केसरिया बालमा ओ री
कि तुमसे लागे नैन, नैन रे
रंग लियो मैं आज अंग अंग तेरे रंग में
तन हुआ मन हुआ केसरिया
चाँदनी है रात अब तो आ जा पिया
आऽ
चाँदनी है रात अब तो आ जा पिया
केसरिया बालमा ओ री …
टकरा के सर को जान न दे दूँ तो क्या करूँ
कब तक फ़िराक़-ए-यार के सदमे सहा करूँ
मैं तो हज़ार चाहूँ कि बोलूँ न यार से
क़ाबू में अपने दिल को न पाऊँ तो क्या करूँ
चाँदनी है रात अब तो आ जा पिया
चाँदनी है रात अब तो आ जा पिया, आ जा पिया
चाँदनी है रात अब तो आ जा पिया
केसरिया बालमा ओ री …
Version II
केसरिया बालमा ओ री
कि बाँवरी बोले लोग
न मैं जिउती न मरियो मैं
बिअरहा म्हारो रोग रे
बाँवरी बोले लोग, लोग रे
केसरिया …
चढ़ते दिन की आँच बटोरूँ
तिल तिल, तिल तिल सब जल जाऊँ
ढलते साँझ की राख कुरेदूँ
रेत में रेत में सब रल जाये
न मिल पायी न बिछड़ी मैं
कैसो ये संजोग रे
बाँवरी बोले लोग रे …
म्हारो थल की लाम्बी साइंया
निस दिन निस दिन कुछ लिख जाऊँ
मेरो सन्देसो कोई सुना दो
जिस को वो जिस को वो दिख जाये
प्रीत को देखे नगरी वाले
पीर न देखे लोग रे
बाँवरी बोले लोग
केसरिया …