र: कैसी हसीन आज बहारों की रात है
एक चाँद आसमां पे है एक मेरे साथ है
म: देने वले तू ने तो कोई कमी न की
अब किस को क्या मिला ये मुक़द्दर की बात है
र: छाय है हुस्न-ओ-इश्क़ पे एक रंग-ए-बेख़ुदी
आते हैं ज़िंदगी में ये आलम कभी कभी
हर ग़म भूल जाओ खूशी की बारात है
एक चाँद आसमां पे है एक मेरे साथ है
म: आई है वो बहार कि नग़मे उबल पड़े
ऐसी खूशी है कि आँसू निकल पड़े
होंठों पे हैं दुआएं मगर दिल पे हाथ है
अब किस को क्या मिला ये मुक़द्दर की बात है
र: मस्ती सिमट के प्यार के गुलशन में आ गैइ
म: मेरी खूशी भी आप के दामन में आ गैइ
भँवरा कली से दूर नहीं साथ साथ है