कहीं भी मेरा ठिकाना नहीं ज़माने में
न आशियाने के बाहर न आशियाने में
अभी बिछाए थे तिनके कि गिर पड़ी बिजली
बना न था कि आग लगी आशियाने में
'क़मर' किसी से भी इसका इलाज हो न सका
हम अपने दाग़ फिरे दिखाते ज़माने में
कहीं भी मेरा ठिकाना नहीं ज़माने में
न आशियाने के बाहर न आशियाने में
अभी बिछाए थे तिनके कि गिर पड़ी बिजली
बना न था कि आग लगी आशियाने में
'क़मर' किसी से भी इसका इलाज हो न सका
हम अपने दाग़ फिरे दिखाते ज़माने में
kahīṅ bhī merā ṭhikānā nahīṅ zamāne meṅ
na āśhiyāne ke bāhar na āśhiyāne meṅ
abhī bichhāe the tinke ki gir paṛī bijlī
banā na thā ki āg lagī āśhiyāne meṅ
'qamar' kisī se bhī iskā ilāj ho na sakā
ham apne dāġh phire dikhāte zamāne meṅ