कहाँ तक जफ़ा हुस्न वालों के सहते
जवानी जो रहती तो फिर हम न रहते
नशेमन न जलता निशानी तो रहती
हमारा था क्या फिर रहते न रहते
कोई नक़्श और कोई दीवार समझा
ज़माना हुआ हमको चुप रहते रहते
ज़्माना बड़े शौक़ से सुन रहा था
हमीं सो गये दासताँ कहते कहते
कहाँ तक जफ़ा हुस्न वालों के सहते
जवानी जो रहती तो फिर हम न रहते
नशेमन न जलता निशानी तो रहती
हमारा था क्या फिर रहते न रहते
कोई नक़्श और कोई दीवार समझा
ज़माना हुआ हमको चुप रहते रहते
ज़्माना बड़े शौक़ से सुन रहा था
हमीं सो गये दासताँ कहते कहते
kahāṇ tak jafā husn vāloṅ ke sahte
javānī jo rahtī to phir ham na rahte
naśheman na jaltā niśhānī to rahtī
hamārā thā kyā phir rahte na rahte
koī naqśh aur koī dīvār samjhā
zamānā huā hamko chup rahte rahte
zmānā baṛe śhauq se sun rahā thā
hamīṅ so gaye dāstāṇ kahte kahte