मुकेश: झिल-मिल तारे करें इशारे सो जा
सो जा, सो जा राजदुलारे
बन अलबेली नार नवेली निन्दिया
निन्दिया आई नैन द्वारे
सुरैया: (मतलब की अँधी ये दुनिया) - 2
(कैसे हमें पहचाने) - 2
दिल के टुकड़े मेरे दिल के,
(दर्द को तू ही जाने) - 2
सब कोई सोये पर हम रोयें
जागें जागें जागें ग़म के मारे
(सुंदर सपने देख मगर
तू मोह न कर सपनों से) - 2
रोज़ बदलती है ये दुनिया
(आस न कर अपनों से) - 2
मुकेश: धूप-छाँव का खेल ये दुनिया
(सुख-दुख आस-निराशा) - 2
(तेरे अंगन एक चाँद एक तारा) - 2
(अंखियन चमके आशा) - 2
ढल जायेगी रात अँधेरी
होंगे, होंगे सोने के दिन सारे