ल: ( झन झन न न न ) -2 पायल बाजे -2
बरखा बरसे हौले हौले -2
( भंवरों ने कलियों के ) -2 घूँघट खोले
झन झन न न न …
पल भर में क्या हुई रे
दिन में जैसे रात हुई रे
मो: इस गोरी का काजल बिखरा
भीगा भीगा आँचल निखरा
तन नाचे मन नाचे तन मन डोले
ल: ओ झन झन न न न …
मो: ( मस्त पवन ) -2 सावन की सहेली
बूझे कोई रुत की पहेली
ल: मन गीतों का मौसम आया
फिर गीतों का मौसम आया -2
जी चाहे जी भर के हँस ले रो ले
हो झन झन न न न …
सु: कितनी सुन्दर सूरत देखो
राधा जैसी मूरत देखो
ल: सूरत का जग मोल लगाए -2
इस मन को इस जग में कोई न तौले
हो झन झन न न न …
सु: बरखा बरसे …