जीना हमको रास न आया, हम जाने क्यों जीते हैं
क्या सावन क्या भादों अपने, सब दिन रोते बीते हैं
जीना हमको …
हम से तो जग रूठ गया है, एक तुम्हारा क्या शिकवा - 2
अब क्यों आहें भरते हैं, हम अब क्यों आँसू पीते हैं
जीना हमको …
प्यार की बाज़ी आसान समझे, हम ने बड़ी नादानी की - 2
दिल की दुहाई देने वाले, यह बाज़ी कब जीते हैं
जीना हमको …
डोरे जुनून में क्या क्या सुझी, क्या क्या हम ने कर डाला - 2
खुद ही गिरहबां फाद लिया है, खुद ही गिरहबां सीते हैं
जीना हमको …