हम इश्क़ के मारों को दो दिल तो दिये होते
हम ने न कभी उन के अहसान लिये होते
इक दिल जो कभी रोता, दूजे से बहल जाते
आहें न भरी होती, शिकवे न किये होते
आते कि न आते वो, परवाह किसे होती
फ़ुर्क़त में किसी के न, मर मर के जिये होते
हम इश्क़ के मारों को दो दिल तो दिये होते
हम ने न कभी उन के अहसान लिये होते
इक दिल जो कभी रोता, दूजे से बहल जाते
आहें न भरी होती, शिकवे न किये होते
आते कि न आते वो, परवाह किसे होती
फ़ुर्क़त में किसी के न, मर मर के जिये होते
ham iśhq ke māroṅ ko do dil to diye hote
ham ne na kabhī un ke ahsān liye hote
ik dil jo kabhī rotā, dūje se bahal jāte
āheṅ na bharī hotī, śhikve na kiye hote
āte ki na āte vo, parvāh kise hotī
furqat meṅ kisī ke na, mar mar ke jiye hote