श: हैराअन हूँ मैं आपकी ज़ुल्फ़ों को देखकर
इनको घटा कहूँ तो घटाओं को क्या कहूँ
अनु: तारीफ़ करना हुस्न की मर्दों की है अदा
इसको अदा कहूँ तो अदाओं को क्या कहूँ
श: हैराअन हूँ मैं …
कितनी है ख़ुशनसीब ये बहकी हुई हवा
हाथों में जिसके रेशमी आँचल है आपका
इतना करीब आपके मैं भी न क्यों हुआ
इसको वफ़ा कहूँ तो वफ़ाओं को क्या कहूँ
अनु: तारीफ़ करना हुस्न की …
श: हैराअन हूँ मैं …
अनु: नग़में मुझे बहार सुनाती रही मगर
उसका मेरी जवानी पे कुछ न हुआ असर
आवाज़ जब तुम्हारी मेरे दिल में उतर गई
कोयल की मीठी मीठी सदाओं को क्या कहूँ
श: हैराअन हूँ मैं …
अनु: तारीफ़ करना हुस्न की …
श: रंगीनियाँ हैं गालों की जैसे चमन के फूल
अनु: जो कुछ जनाब सब है मुझे क़ुबूल है
श: बहके हुए कदम हैं तो महका हुआ बदन
तुमको फ़ज़ा कहूँ तो फ़ज़ाओं को क्या कहूँ
अनु: तारीफ़ करना हुस्न की …
श: हैराअन हूँ मैं …