एक दिल हज़ार ग़म
कैसे जी सकेंगे हम
ज़िंदगी बिछड़ गयी
हर खुशी उजड़ गयी
आँख हो चली है नम
कैसे जी सकेंगे हम …
आसमाँ बदल गया
ज़मीं का तीर चल गया
डस रहे हैं हर सितम
कैसे जी सकेंगे हम …
एक दिल हज़ार ग़म
कैसे जी सकेंगे हम
ज़िंदगी बिछड़ गयी
हर खुशी उजड़ गयी
आँख हो चली है नम
कैसे जी सकेंगे हम …
आसमाँ बदल गया
ज़मीं का तीर चल गया
डस रहे हैं हर सितम
कैसे जी सकेंगे हम …
ek dil hazār ġham
kaise jī sakeṅge ham
ziṅdgī bichhaṛ gayī
har khuśhī ujaṛ gayī
āṇkh ho chalī hai nam
kaise jī sakeṅge ham …
āsmāṇ badal gayā
zamīṅ kā tīr chal gayā
ḍas rahe haiṅ har sitam
kaise jī sakeṅge ham …