र: दिलबर-दिलबर कहते-कहते हुआ दीवाना
आँख में मेरी झाँक के देखो जान-ए-जानाँ
कौन तुम्हारा अपना है और कौन बेगाना
ओ मेरी जान ज़रा पहचान -2
आ: दिलबर-दिलबर सुनते-सुनते हुई दीवानी
हाय रे किस मंज़िल पे आके रुकी कहानी
बोल मेरे दिल किससे है अब प्रीत निभानी
फँसी है जान -2
र: अब हुस्न इश्क़ का संगम हो जाने दे
आग़ोश में अपने जानम खो जाने दे
ये मेल है दिल से दिल का कोई खेल नहीं
दो दिल ना अगर मिल जाएँ वो मेल नहीं
आ: ओ मर गई मर गई अब क्या करूँ मैं
हाय रे मोहब्बत क्या करूँ मैं
तुझसे मिलूँ या इससे मिलूँ मैं
हो फँसी है जान …
र: है ज़ुल्फ़ तेरी आवारा हाय क्या कहना
मुझे लूट लिया दिलदार हाय क्या कहना
जो प्यार करे ये उसका अंदाज़ नहीं
परवाने के जलने में आवाज़ नहीं
आ: हो कैसी मुश्क़िल आन पड़ी है
दोराहे पे प्रीत खड़ी है
किस जालिम से आँख लड़ी है
हो फँसी है जान …
र: तेरी आँख है या ज़ालिम पैमाने हैं
तेरी एक बात में लाखों अफ़साने हैं
तू देख ग़ौर से मुझको तेरा अपना हूँ
हर रात को तू जो देखे वो सपना हूँ
आ: एक है दिल और दो दीवाने
एक शमा और दो परवाने
क्या होगा ये कोई न जाने
हो फँसी है जान …
र: दिलबर-दिलबर …