रफ़ी: तू भी आजा के आ गई रुत मस्तानी )
ओ ढोल सजना, ढोल जानी ) - 2
मेरी गली आ, तेरी महरबानी )
लता: ओ …
तेरे बिन सूनी-सूनी है शाम सुहानी
ओ ढोल सजना, ढोल जानी
मेरी गली आ, तेरी महरबानी
रफ़ी: कहनी हैं सुननी हैं कितनी ही बातें - 2
थोड़े-से दिन हैं ये, थोड़ी-सी रातें
हो … ऐसा ना हो …
के ऐसा ना हो गुजर जाए यूँही जवानी
ओ ढोल सजना ढोल जानी
मेरी गली आ तेरी महरबानी
लता: तेरे बिन सूनी-सूनी है शाम सुहानी
ओ ढोल सजना ढोल जानी
मेरी गली आ तेरी महरबानी
लता: लाज-सरम से मैं तो मरी-मरी जाऊँ - 2
राह चलत मैं तो डरी-डरी जाऊँ
ओ … ऐसा लागे …
ऐसा लागे मैं हो गई प्रेम-दिवानी
ओ ढोल सजना ढोल जानी
मेरी गली आ तेरी महरबानी
रफ़ी: हो तू भी आजा के आ गई रुत मस्तानी
दोनों: ओ ढोल सजना ढोल जानी
मेरी गली आ तेरी महरबानी
Solo Version
लता: तू भी आजा के आ गई रुत मस्तानी
ओ ढोल सजना, ढोल जानी ) - 2
मेरी गली आ, तेरी महरबानी )
रोग जुदाई का क्युं जी को लगाया
आने का वादा किया काहे न आया
हो, छाई बनके बदरीया प्रीत पुरनी
ओ ढोल सजना, ढोल जानी ) - 2
मेरी गली आ, तेरी महरबानी )