दीवानों से ये मत पूछो दीवानों पे क्या गुज़री है
हाँ उनके दिलों से ये पूछो, अरमानों पे क्या गुज़री है
दीवानों से ये मत पूछो …
औरों को पिलाते रहते हैं
और ख़ुद प्यासे रह जाते हैं
ये पीने वाले क्या जाने
पैमानों पे क्या गुज़री है
दीवानों से ये मत पूछो …
मालिक ने बनाया इनसाँ को
इनसान मुहब्बत कर बैठा
वो ऊपर बैठा क्या जाने
इनसानों पे क्या गुज़री है
दीवानों से ये मत पूछो …