दर्दमंदों का जहाँ में आसरा कोई नहीं
बेवफ़ा सारा ज़माना बावफ़ा कोई नहीं
बेवफ़ा सारा ज़माना
रोके आँखें पूछती हैं मेरे दिल से बार बार
इब्तिदा रोने की है, क्या इंतिहा कोई नहीं?
इब्तिदा रोने की है, क्या
जब उमीदों ने ये पूछा अब तुम्हारा कौन है
आरज़ूओं ने तड़प कर यूँ कहा कोई नहीं
आरज़ूओं ने तड़प कर
क्या कहें किससे कहें क्यूँकर कहें कैसे कहें
सुननेवाला दास्तान-ए-दर्द का कोई नहीं
दर्दमंदों का जहाँ में