ल: अपनी कहो कुछ मेरी सुनो
क्या दिल का लगाना भूल गए, क्या भूल गए
त: रोने की आदत ऐसी पड़ी
हँसने का तराना भूल गए, हाँ भूल गए
ल: काली रातें बीत गईं
फिर चाँदनी रातें आई हैं -2
त: दिल में नहीं उजियाला मेरे
ग़म की घटाएं छाई हैं -2
ल: प्रीत के वादे याद करो
क्या प्रीत निभाना भूल गए, क्या भूल गए
त: भूला हुआ है राह मुसाफ़िर
बिछड़ा हुआ है मंज़िल से -2
ल: खोए हुए रस्ते का पता
तुम पूछ लो ख़ुद अपने दिल से -2
त: चलते चलते ऐसे थके
मंज़िल का ठिकाना भूल गए, हाँ भूल गए
ल: नज़्दीक आओ, नज़्दीक आ …
यह मौसम नहीं फिर आने का -2
त: नज़्दीक शमा के जाने से
क्या हाल हुआ पर्वाने का -2
ल: मिटने का फ़साना याद रहा
जलने का फ़साना भूल गए, क्या भूल गए
अपनी कहो कुछ मेरी सुनो
क्या दिल का लगाना भूल गए, क्या भूल गए