अपने न हो सके जो दिल का क़रार हो कर
आँखों में बस गये हैं रंग-ए-बहार हो कर
पहले न ये ख़बर थी है मौत दिल का आना
जो फूल खिल रहा था खटका वो ख़ार हो कर
हम दिल में दफ़्न कर के सब मुर्दा हसरतों को
ख़ामोश जल रहे हैं शम्म-ए-मज़ार हो कर्
अपने न हो सके जो दिल का क़रार हो कर
आँखों में बस गये हैं रंग-ए-बहार हो कर
पहले न ये ख़बर थी है मौत दिल का आना
जो फूल खिल रहा था खटका वो ख़ार हो कर
हम दिल में दफ़्न कर के सब मुर्दा हसरतों को
ख़ामोश जल रहे हैं शम्म-ए-मज़ार हो कर्
apne na ho sake jo dil kā qarār ho kar
āṇkhoṅ meṅ bas gaye haiṅ raṅg-e-bahār ho kar
pahle na ye khabar thī hai maut dil kā ānā
jo phūl khil rahā thā khaṭkā vo khār ho kar
ham dil meṅ dafn kar ke sab murdā hasartoṅ ko
khāmośh jal rahe haiṅ śhamm-e-mazār ho kar