ल: ( अँखियाँ गुलाबी जैसे
मद की हैं प्यालियाँ
मद की हैं प्यालियाँ
र: जागी हुई आँखों में
शरम की हैं लालियाँ
शरम की हैं लालियाँ ) -2
ल: ( दिन हैं जवानी के
उल्फ़त की रातें ) -2
( तारों की छाँव में हैं
प्यार भरी बातें ) -2
सुलझी हुई लटों में
हो हो हो
सुलझी हुई लटों में
उलझ गईं बालियाँ
अँखियाँ गुलाबी जैसे
मद की हैं प्यालियाँ
मद की हैं प्यालियाँ
र: जागी हुई आँखों में
शरम की हैं लालियाँ
शरम की हैं लालियाँ
( दुनिया मेरी आँखों में है
तेरे ख़याल की ) -2
( भरी हुई फूलों से है
झोली सवाल की ) -2
खिली हैं बहारों में
हो हो हो
खिली हैं बहारों में
फूलों की डालियाँ
अँखियाँ गुलाबी जैसे
मद की हैं प्यालियाँ
मद की हैं प्यालियाँ
ल: जागी हुई आँखों में
शरम की हैं लालियाँ
शरम की हैं लालियाँ
( आधी-आधी रात कोई
काहे जगाये रे ) -2
नाज़ुक कलाई मोरी
बल खा ना जाये रे
आधी-आधी रात कोई
काहे जगाये रे
सुन-सुन ख़ुश हुये
हो हो हो
सुन-सुन ख़ुश हुये
मीठी-मीठी गालियाँ
अँखियाँ गुलाबी जैसे
मद की हैं प्यालियाँ
मद की हैं प्यालियाँ
र: जागी हुई आँखों में
शरम की हैं लालियाँ
शरम की हैं लालियाँ