ल: ऐ चाँद ज़रा सुन ले छोटा सा फ़साना है
हु: तुझ पर भी जवानी है अपना भी ज़माना है
ऐ चाँद ज़रा सुन ले
हु: इक हुस्न का पनघट पर इक हुस्न की रानी थी
ख़ामोश निगाहें थी ग़ुरबत में जवानी थी
ल: ख़ामोश निगाहों का कुछ हाल सुनाना है
ऐ चाँद ज़रा सुन ले …
ल: अनजान की नज़रों में कुछ ऐसी हुई बातें
पहचानी हुई जैसे होती हैं मुलाक़तें
हु: क्या दिल में किसी के था ये दिल ने ही जाना है
ऐ चाँद ज़रा सुन ले …
ल: आँखों से हमारी वो तसवीर नहीं जाती
हु: पहले की तरह हम को क्यों नींद नहीं आती
ल: वो और ज़माना था ये और ज़माना है
ऐ चाँद ज़रा सुन ले …