दो: आई बसन्त ऋतु मदमाती -2
मन ललचाती उमंग बढ़ाती -2
सु: सोता प्रेम जगाती
दो: आई बसन्त ऋतु मदमाती
सु: सोता प्रेम जगाती
दो: आई बसन्त ऋतु मदमाती -2
ह: ( डार-डार से कन्चन बरसे
पात-पात से जोबन बरसे ) -2
फूल खिलाती जग महकाती हरियाली लहकाती -2
दो: आई बसन्त ऋतु मदमाती -2
सु: अम्बुआ डार पर कोयल बोले
( अम्बुआ डार पर कोयल बोले
मन का भेद पपीहा खोले ) -2
भँवरा छेड़ के गीत सुनाता
( भँवरा छेड़ के गीत सुनाता
कली-कली मुसकाती ) -2
दो: आई बसन्त ऋतु मदमाती -2
मन ललचाती उमंग बढ़ाती -2
सु: सोता प्रेम जगाती
दो: आई बसन्त ऋतु मदमाती
सु: सोता प्रेम जगाती
दो: आई बसन्त ऋतु मदमाती -2