आ गई याद शाम ढलते ही
बुझ गया दिल चराग़ जलते ही
खुल गये सहर-ए-ग़म के दरवाज़े
इक ज़रा सी हवा के चलते ही
कौन था तू के फिर न देखा तुझे
मिट गया ख़ाब आँख मलते ही
तू भी जैसे बदल सा जाता है
अक्स-ए-दीवार के बदलते ही
आ गई याद शाम ढलते ही
बुझ गया दिल चराग़ जलते ही
खुल गये सहर-ए-ग़म के दरवाज़े
इक ज़रा सी हवा के चलते ही
कौन था तू के फिर न देखा तुझे
मिट गया ख़ाब आँख मलते ही
तू भी जैसे बदल सा जाता है
अक्स-ए-दीवार के बदलते ही
ā gaī yād śhām ḍhalte hī
bujh gayā dil charāġh jalte hī
khul gaye sahar-e-ġham ke darvāze
ik zarā sī havā ke chalte hī
kaun thā tū ke phir na dekhā tujhe
miṭ gayā khāb āṇkh malte hī
tū bhī jaise badal sā jātā hai
aksa-e-dīvār ke badalte hī